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इजराइल israel की वर्तमान स्थिति

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दयारा बुग्याल ट्रैक ( बटर फेस्टिवल )

 दयारा बुग्याल ट्रैक

जैसा की आपने इससे पहले वाले ब्लॉग मे दयारा बुग्याल ट्रैक के बारे में जाना उसी प्रकार आज के ब्लॉग मे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जानेंगे दयारा बुग्याल ट्रैक के बारे मैं |

आज हम जानेंगे दयारा बुग्याल में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार अंडूड़ी उत्सव या माखन महोत्सव 



अंडूड़ी उत्सव या बटर फेस्टिवल 

देवभूमि उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है जो अपनी अनूठी संस्कृति ओर त्योहारों के लिए जाना जाता है , जो ज्ञान की अनुपलब्धता के कारण आज पहाड़ों तक ही सीमित है | ऐसा ही एक विशिष्ट त्यौहार है अंडूड़ी उत्सव या बटर फेस्टिवल ।भादों संक्राति पर मनाया जाता है हर साल 16 से 18 अगस्त के बीच मनाया जाता है । 




जैसा कि नाम से ही पता चलता है, मक्खन की होली एक ऐसा त्योहार है जिसमे स्थानीय निवासी एक दूसरे पर दूध, मक्खन, मट्ठा लागले है होली खेलते है | बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक कोई भी इस महोत्सव के सफेद रंग से गदगद होने का मोका नहीं छोड़ता |




यह पर्व स्थानीय लोगों द्वारा प्रकृति के प्रति आभार जताने के उद्देश्य से मनाया जाता है और इसके पीछे एक गहरी मान्यता जुड़ी है , रेथल गाँव के निवासी ग्रीष्मकाल के दौरान अपने पशुओं को चराने के लिए दयारा बुग्याल ले जाते है और वहीं पर छानियों में निवास करते है, जहां उन्हे पशुधन की समृद्धि होती है । ग्रामीण इस समृद्धि को संजोने ओर उसका समान कर प्रकृति का आभार ब्यक्त करने हेतु बटर फेस्टिवल का आयोजन करते है ।


स्थानीय लोगों द्वारा यह पर्व बड़े हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमे की बुग्याल देवी को सम्मानित करने के लिए आस-पास के गांवों के लोग भी शामिल होते है । ग्रामीणों द्वारा भगवान श्री कृष्ण और राधा के भव्य किरदार बनाए जाते है और कन्हैया लाल के द्वारा माखन की मटकी फोड़ी जाती है , कन्हैया लाल की झांकी निकली जाती है ग्रामीण लोग इस पर्व मे सराभौर हो जाते है और मस्ती मे डूब कर जय कन्हैया लाल के नारे लगाते हुए झूमते है । 


ढोल दमाऊ ( एक पहाड़ी वाध्य यंत्र ) की धुन पर झूमते लोग एक दूसरे पर माखन ओर मट्ठा,दूध की पिचकारी मारते हुये मस्ती मे झूमते है ।  स्थानीय महिलाये पहाड़ी पोसाख पहन कर रासो नृत्य आदि करते है । बाहर से आए हुए लोग भी इस पर का आनंद लेते है । 




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