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इजराइल israel की वर्तमान स्थिति

  इजराइल ( israel)  की वर्तमान स्थिति: संघर्ष, सुरक्षा, और शांति की उम्मीद     आज, इजराइल एक बार फिर से ऐसे तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है, जिसने न केवल उसके नागरिकों को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। इजराइल और उसके पड़ोसी देशों के बीच चल रहे संघर्षों का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है—सैनिक, राजनीतिक, और सबसे महत्वपूर्ण, मानवता के स्तर पर। वर्तमान संघर्ष और इसके कारण अक्टूबर 2024 में ईरान और इजराइल के बीच तनाव ने एक नया रूप लिया जब ईरान ने 180 से अधिक मिसाइलें इजराइल पर दागीं। यह हमले इजराइल के द्वारा हमास और हिज़बुल्लाह के महत्वपूर्ण नेताओं की हत्याओं का प्रतिशोध थे। इन हमलों ने यरुशलम और तेल अवीव जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया, जिससे देशभर में डर का माहौल बन गया। हालाँकि इजराइल की अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली "आयरन डोम" ने अधिकतर मिसाइलों को रोक लिया, फिर भी नुकसान हुआ और नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर हो गए​ ।  इसके साथ ही, लेबनान के साथ इजराइल की सीमा पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हिज़बुल्लाह, जो कि लेबनान म...

athletics paralympics 2024

  पेरिस 2024 पैरालंपिक: एथलेटिक्स की एक झलक पेरिस 2024 पैरालंपिक खेल बस शुरू होने वाले हैं, जो एथलेटिक्स की उत्कृष्टता, दृढ़ता और प्रतिस्पर्धा की भावना का एक रोमांचक प्रदर्शन करने का वादा करते हैं। शानदार स्टेड डी फ्रांस की पृष्ठभूमि के साथ, दुनिया भर के एथलीट विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एकत्रित होंगे, जो कि संभावनाओं की सीमाओं को चुनौती देंगे और लाखों लोगों को प्रेरित करेंगे। आइए इस महत्वपूर्ण आयोजन के एथलेटिक्स कार्यक्रमों में क्या उम्मीद की जा सकती है, उस पर एक नजर डालें। स्टेड डी फ्रांस में एक भव्य मंच एथलेटिक्स के कार्यक्रम प्रतिष्ठित स्टेड डी फ्रांस में आयोजित किए जाएंगे, एक ऐसा स्थान जिसने खेलों में कुछ सबसे ऐतिहासिक क्षण देखे हैं। 28 अगस्त से 8 सितंबर, 2024 तक, यह स्टेडियम एक ऐसे युद्धक्षेत्र में बदल जाएगा जहाँ शारीरिक, दृष्टि और बौद्धिक विकलांगता वाले एथलीट्स गौरव के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। पैरालंपिक एथलीटों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ, रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन और अविस्मरणीय पलों के लिए मंच तैयार है। कार्यक्रम और वर्गीकरण...

दयारा बुग्याल ट्रैक ( बटर फेस्टिवल )

  दयारा बुग्याल ट्रैक जैसा की आपने इससे पहले वाले ब्लॉग मे दयारा बुग्याल ट्रैक के बारे में जाना उसी प्रकार आज के ब्लॉग मे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जानेंगे दयारा बुग्याल ट्रैक के बारे मैं | आज हम जानेंगे दयारा बुग्याल में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार अंडूड़ी उत्सव या माखन महोत्सव  अंडूड़ी उत्सव या बटर फेस्टिवल  देवभूमि उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है जो अपनी अनूठी संस्कृति ओर त्योहारों के लिए जाना जाता है , जो ज्ञान की अनुपलब्धता के कारण आज पहाड़ों तक ही सीमित है | ऐसा ही एक विशिष्ट त्यौहार है  अंडूड़ी उत्सव या बटर फेस्टिवल ।भादों संक्राति पर मनाया जाता है हर साल 16 से 18 अगस्त के बीच मनाया जाता है ।  जैसा कि नाम से ही पता चलता है, मक्खन की होली एक ऐसा त्योहार है जिसमे स्थानीय निवासी एक दूसरे पर दूध, मक्खन, मट्ठा लागले है होली खेलते है | बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक कोई भी इस महोत्सव के सफेद रंग से गदगद होने का मोका नहीं छोड़ता | यह पर्व स्थानीय लोगों द्वारा प्रकृति के प्रति आभार जताने के उद्देश्य से मनाया जाता है और इसके पीछे एक गहरी मान्यता जुड़ी है , रेथल गाँव के निवासी ग्...

दयारा बुग्याल ट्रैक

दयारा बुग्याल ट्रैक   दयारा बुग्याल भारत के उत्तराखंड राज्य, जिला उत्तरकाशी ,विकास खण्ड भटवाड़ी , रैथल गाँव से लगभग  9 किलोमीटर पेदल ट्रैक में स्थित सबसे खूबसूरत उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों में से एक है। यह उत्तरकाशी जिले में स्थित है और ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। "बुग्याल" एक स्थानीय शब्द है जो अल्पाइन घास के मैदानों के लिए उपयोग किया जाता है, और दयारा बुग्याल इसका सबसे सुंदर उदाहरण है, जो लगभग 28 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और समुद्र तल से लगभग 3,408 मीटर (11,181 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। दयारा बुग्याल पहुँचने का मार्ग: उत्तरकाशी से रेथल गाँव : सबसे पहले आपको उत्तरकाशी से रेथल गाँव पहुंचना होगा | उत्तरकाशी से रेथल की दूरी लगभग 40 km है , जिसे आप टेक्सी या बस के माध्यम से तय कर सकते हो | यह यात्रा लगभग 2 घंटे मे पूरी होती है | रेथल से दयारा बुग्याल ट्रैक  रेथल गाँव से दयारा बुग्याल तक का ट्रेक शुरू होता है। यह ट्रेक लगभग 9  किलोमीटर लंबा है और आपको लगभग 3 से 4 घंटे में दयारा बुग्याल पहुँचाया जा सकता है। मार्ग के दौरान आप घन...

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दयारा बुग्याल ट्रैक

दयारा बुग्याल ट्रैक   दयारा बुग्याल भारत के उत्तराखंड राज्य, जिला उत्तरकाशी ,विकास खण्ड भटवाड़ी , रैथल गाँव से लगभग  9 किलोमीटर पेदल ट्रैक में स्थित सबसे खूबसूरत उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों में से एक है। यह उत्तरकाशी जिले में स्थित है और ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। "बुग्याल" एक स्थानीय शब्द है जो अल्पाइन घास के मैदानों के लिए उपयोग किया जाता है, और दयारा बुग्याल इसका सबसे सुंदर उदाहरण है, जो लगभग 28 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और समुद्र तल से लगभग 3,408 मीटर (11,181 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। दयारा बुग्याल पहुँचने का मार्ग: उत्तरकाशी से रेथल गाँव : सबसे पहले आपको उत्तरकाशी से रेथल गाँव पहुंचना होगा | उत्तरकाशी से रेथल की दूरी लगभग 40 km है , जिसे आप टेक्सी या बस के माध्यम से तय कर सकते हो | यह यात्रा लगभग 2 घंटे मे पूरी होती है | रेथल से दयारा बुग्याल ट्रैक  रेथल गाँव से दयारा बुग्याल तक का ट्रेक शुरू होता है। यह ट्रेक लगभग 9  किलोमीटर लंबा है और आपको लगभग 3 से 4 घंटे में दयारा बुग्याल पहुँचाया जा सकता है। मार्ग के दौरान आप घन...

इजराइल israel की वर्तमान स्थिति

  इजराइल ( israel)  की वर्तमान स्थिति: संघर्ष, सुरक्षा, और शांति की उम्मीद     आज, इजराइल एक बार फिर से ऐसे तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है, जिसने न केवल उसके नागरिकों को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। इजराइल और उसके पड़ोसी देशों के बीच चल रहे संघर्षों का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है—सैनिक, राजनीतिक, और सबसे महत्वपूर्ण, मानवता के स्तर पर। वर्तमान संघर्ष और इसके कारण अक्टूबर 2024 में ईरान और इजराइल के बीच तनाव ने एक नया रूप लिया जब ईरान ने 180 से अधिक मिसाइलें इजराइल पर दागीं। यह हमले इजराइल के द्वारा हमास और हिज़बुल्लाह के महत्वपूर्ण नेताओं की हत्याओं का प्रतिशोध थे। इन हमलों ने यरुशलम और तेल अवीव जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया, जिससे देशभर में डर का माहौल बन गया। हालाँकि इजराइल की अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली "आयरन डोम" ने अधिकतर मिसाइलों को रोक लिया, फिर भी नुकसान हुआ और नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर हो गए​ ।  इसके साथ ही, लेबनान के साथ इजराइल की सीमा पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हिज़बुल्लाह, जो कि लेबनान म...

उत्तराखंड में हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं का गहरा प्रभाव पड़ा है।

 उत्तराखंड में हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं का गहरा प्रभाव पड़ा है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड विशेष रूप से ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों के प्रति संवेदनशील है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण और समाज के सामने कई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। 1. बादल फटने और अचानक बाढ़ की बढ़ती घटनाएं बादल फटना : उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जो अचानक और तीव्र वर्षा की घटनाएँ हैं जो विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकती हैं। ये घटनाएँ अक्सर मानसून के मौसम में होती हैं और भूस्खलन, घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर देती हैं। हाल की घटनाएँ : हाल के वर्षों में उत्तराखंड के चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में कई बादल फटने की घटनाओं के कारण भीषण बाढ़ आई है। इन घटनाओं में जानमाल का नुकसान, लोगों का विस्थापन और महत्वपूर्ण आर्थिक क्षति हुई है। 2. पिघलते ग्लेशियर और हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOFs) ग्लेशियर का पिघलना : उत्तराखंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियर झीलों का निर्माण हो रहा है जो अक्सर अस्थिर होती हैं और फट सकती हैं...