इजराइल ( israel) की वर्तमान स्थिति: संघर्ष, सुरक्षा, और शांति की उम्मीद आज, इजराइल एक बार फिर से ऐसे तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है, जिसने न केवल उसके नागरिकों को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। इजराइल और उसके पड़ोसी देशों के बीच चल रहे संघर्षों का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है—सैनिक, राजनीतिक, और सबसे महत्वपूर्ण, मानवता के स्तर पर। वर्तमान संघर्ष और इसके कारण अक्टूबर 2024 में ईरान और इजराइल के बीच तनाव ने एक नया रूप लिया जब ईरान ने 180 से अधिक मिसाइलें इजराइल पर दागीं। यह हमले इजराइल के द्वारा हमास और हिज़बुल्लाह के महत्वपूर्ण नेताओं की हत्याओं का प्रतिशोध थे। इन हमलों ने यरुशलम और तेल अवीव जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया, जिससे देशभर में डर का माहौल बन गया। हालाँकि इजराइल की अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली "आयरन डोम" ने अधिकतर मिसाइलों को रोक लिया, फिर भी नुकसान हुआ और नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर हो गए । इसके साथ ही, लेबनान के साथ इजराइल की सीमा पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हिज़बुल्लाह, जो कि लेबनान म...
History Of Uttarakhand
उत्तराखण्ड उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं।
उत्तराखण्ड का भूगोल
उत्तराखण्ड का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल २८° ४३’ उ. से ३१°२७’ उ. और रेखांश ७७°३४’ पू से ८१°०२’ पू के बीच में ५३,४८३ वर्ग किमी है, जिसमें से ४३,०३५ कि.मी.२ पर्वतीय है और ७,४४८ कि.मी.२ मैदानी है, तथा ३४,६५१ कि.मी.२ भूभाग वनाच्छादित है। राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय श्रृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढका हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढकी हुई हैं जिनका पहले अंग्रेज़ लकड़ी व्यापारियों और स्वतन्त्रता के बाद वन अनुबन्धकों द्वारा दोहन किया गया। हाल ही के वनीकरण के प्रयासों के कारण स्थिति प्रत्यावर्तन करने में सफलता मिली है। हिमालय के विशिष्ठ पारिस्थितिक तन्त्र बड़ी संख्या में पशुओं (जैसे भड़ल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ और बाघ), पौंधो और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का घर है। भारत की दो सबसे महत्वपूर्ण नदियाँ गंगा और यमुना इसी राज्य में जन्म लेतीं हैं और मैदानी क्षेत्रों तक पहुँचते-२ मार्ग में बहुत से तालाबों, झीलों, हिमनदियों की पिघली बर्फ से जल ग्रहण करती हैं।
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